इनकम टैक्स रिटर्न — सही फ़ॉर्म, सही रिजीम
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था (रिजीम) दोनों से गणना करके जो आपके लिए बेहतर हो, उसी से रिटर्न। सही ITR फ़ॉर्म, सभी कटौतियाँ, ई-वेरिफ़िकेशन और रिफ़ंड पर नज़र — सब एक जगह।
किसे चाहिए
- नई व्यवस्था में ₹4 लाख और पुरानी व्यवस्था में ₹2.5 लाख से ज़्यादा आय वाले
- जिनका TDS कटा है और रिफ़ंड चाहिए
- व्यवसायी और प्रोफ़ेशनल — किताबों के साथ या अनुमानित आय (44AD/44ADA) योजना में
- जिनकी पूँजीगत लाभ (शेयर, प्रॉपर्टी) या विदेशी आय है
- लोन, वीज़ा या टेंडर के लिए ITR चाहिए — आय सीमा से कम हो तब भी
ज़रूरी दस्तावेज़
- PAN (आधार से लिंक) और आधार
- बैंक खाता और IFSC (रिफ़ंड के लिए)
- फ़ॉर्म 16 या सैलरी स्लिप
- AIS, TIS और 26AS (पोर्टल से)
- बैंक / FD ब्याज प्रमाणपत्र
- किराये की आय और प्रॉपर्टी विवरण
- पूँजीगत लाभ के लिए ब्रोकर स्टेटमेंट या बिक्री विलेख
- पुरानी व्यवस्था में कटौती के प्रमाण (80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज)
प्रक्रिया — कदम दर कदम
-
दस्तावेज़ जमा
आप दस्तावेज़ भेजते हैं; ज़रूरत हो तो AIS हम पोर्टल से निकालते हैं।
-
दोनों रिजीम की तुलना
पुरानी और नई व्यवस्था में टैक्स की गणना — जो कम, वही चुनी जाती है।
-
ड्राफ़्ट और मंज़ूरी
सही ITR फ़ॉर्म में ड्राफ़्ट, आपकी मंज़ूरी के बाद।
-
फ़ाइलिंग और ई-वेरिफ़िकेशन
रिटर्न दाख़िल और आधार OTP से ई-वेरिफ़ाई।
-
रिफ़ंड पर नज़र
रिफ़ंड आने तक ट्रैकिंग; 143(1) सूचना आए तो उसका जवाब भी।
फ़ीस में क्या शामिल है
- सही ITR फ़ॉर्म का चुनाव
- पुरानी बनाम नई व्यवस्था की तुलना
- सभी लागू कटौतियाँ
- ई-फ़ाइलिंग और ई-वेरिफ़िकेशन
- रिफ़ंड ट्रैकिंग
- धारा 143(1) सूचना का जवाब
वेतनभोगी रिटर्न ₹850 से + 18% GST। व्यवसाय, पूँजीगत लाभ या ऑडिट वाले मामलों में फ़ीस लिखित कोटेशन में।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन-सा ITR फ़ॉर्म भरूँ?
ITR-1: वेतन और ब्याज, आय ₹50 लाख तक। ITR-2: पूँजीगत लाभ या विदेशी आय। ITR-3: किताबों के साथ व्यवसाय/प्रोफ़ेशन। ITR-4: अनुमानित आय योजना (44AD/44ADA/44AE)।
नई या पुरानी व्यवस्था — कौन-सी बेहतर?
यह आपकी कटौतियों पर निर्भर है। नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर छूट (रिबेट) के कारण टैक्स नहीं लगता — वेतनभोगी के लिए ₹75,000 मानक कटौती के साथ ₹12.75 लाख तक। ज़्यादा कटौतियाँ हों तो पुरानी व्यवस्था बेहतर हो सकती है; हम दोनों से गणना करते हैं।
तारीख़ निकल जाए तो क्या करें?
बिलेटेड (देर से) रिटर्न आकलन वर्ष के 31 दिसंबर तक भरा जा सकता है, धारा 234F के तहत लेट फ़ीस के साथ — ₹5,000, या ₹5 लाख तक की आय पर ₹1,000।
नया इनकम-टैक्स एक्ट क्या बदलता है?
इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 एक अप्रैल 2026 से लागू है। वित्त वर्ष 2025-26 की आय का रिटर्न अभी भी 1961 के एक्ट के तहत भरा जाता है; बदलाव आगे के वर्षों पर लागू होंगे।
अन्य सेवाएँ हिंदी में
पूरी तकनीकी जानकारी, कैलकुलेटर और उदाहरण अंग्रेज़ी पेज पर हैं। सभी 63 सेवाएँ यहाँ देखें।
शुरू करने के लिए बस एक संदेश भेजें
काम शुरू होने से पहले लिखित कोटेशन। पहली बातचीत मुफ़्त है।